ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़, ये तेरा बयान “ग़ालिब”

ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाल(meeting)-ए-यार होता

अगर और जीते रहते यही इन्तज़ार होता

तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना

के ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीमकश(half drawn arrow) को

ये ख़लिश(pain) कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

ये कहाँ की दोस्ती है के बने हैं दोस्त नासेह

कोई चारासाज़ होता, कोई ग़मगुसार होता

नासेह – advisors, चारासाज़- Healer,ग़मगुसार -Sympathetic

कहूँ किस से मैं के क्या है, शब-ए-ग़म(sad evening) बुरी बला है

मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

हुए मर के हम जो रुसवा, हुए क्योँ न ग़र्क़-ए-दरिया

न कभी जनाज़ा उठता, न कहीं मज़ार होता

रुसवा – embarrassed,ग़र्क़-ए-दरिया – Drowned in a river

ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़, ये तेरा बयान “ग़ालिब”

तुझे हम वली समझते, जो न बादाख़्वार होता

मसाइल-ए-तसव्वुफ़ – Matters of spirituality,वली – Sage,बादाख़्वार – Drunkard


Published in:  on 01/24/2009 at 8:35 AM Leave a Comment
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