लोग

आते जाते सडकों पर

देखो कितने सारे लोग

कल आये थे कल जायेंगे

हैं ये सब  बंजारे  लोग

काले गोरे मोटे पतले

फिरते मारे मारे सब

एक  सी सांसे अलग है जीवन

मेरे और तुम्हारे लोग

सबकी अलग उम्मीदें हैं

पर सबकी एक कहानी है

कभी मुझे ये लगें कमीने

और कभी बेचारे लोग

सारे चेहरे एक से चेहरे

नज़रें किसको ढूंढ रहीं

जैसे भीड मे मिल जायेंगे

मुझको  हैं जो प्यारे लोग

रोज़ यही मजमा लगता है

लेकिन  आज ना जाने क्यूं

ऐसा लगता है मुझको कि

मर जायेंगे सारे लोग

By aahang

Published in:  on 11/14/2009 at 12:10 PM Comments (2)
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2 Comments Leave a comment.

  1. “कभी मुझे ये लगें कमीने
    और कभी बेचारे लोग”

    हर रंग समेटे हुए आदमी । सच है ।

    • हिमांशु जी आप का बहुत बहुत शुक्रिया ब्लाग पर आने और प्रितिक्रिया बांटने के लिये.


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