कभी कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है

कभी कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है

Sometimes I have entertained myself so

Have explained to others,What I do not know

हमसे पूछो इज़्ज़त वालों की इज़्ज़त का हाल कभी
हमने भी इस शहर में रह कर थोड़ा नाम कमाया है

Ask me of  prestige,stature and  fame

In this  city,even I have made some name

उससे बिछड़े बरसों बीते लेकिन आज न जाने क्यों
आँगन में हँसते बच्चों को बे-कारण धमकाया है

It’s been years now, since we have lived apart

Don’t know why I shouted at kids in the courtyard

कोई मिला तो हाथ मिलाया कहीं गए तो बातें की

घर से बाहर जब भी निकले दिन भर बोझ उठाया है

I met someone ,conversed, held my hand out in a hand shake

Whenever I went out though ,I felt as if I am carrying a weight

~ निदा फ़ाज़ली

~ Interpretative translation by aahang


Published in:  on 03/20/2009 at 9:58 PM Leave a Comment
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ज़ब से तूनें मुझे दीवाना बना रखा है

संग(stone)हर शख्स ने हांथों में उठा रखा है

ज़ब से तूनें मुझे दीवाना बना रखा है

पत्थ्ररों आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो

मैनें तुम को भी कभी अपना खुदा रखा है

पी जा अय्याम की तल्खी(bitterness of life) को भी हंस कर नासिर

गम को सेहनें में भी कुदरत ने मज़ा रखा है

Published in:  on 03/01/2009 at 8:01 AM Leave a Comment
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तुने दीवाना बनाया तो मैं दीवाना बना…

तेरे दर के फकीर हैं हम लोग

क्या अमीर ओ कबीर् हैं हम लोग

दोनो आलम की क़ैद से आज़ाद

एक तेरे असीर हैं हम लोग्

तू मिला भी है तू जुदा भी है abida-1
तेरा क्या कहना

तू सनम भी है तू खुदा भी है
तेरा क्या कहना

ये तमन्ना है के आज़ादे तमन्ना ही रहूँ
दिले मायूस को मायूस ए तमन्ना न बना…

तुने दीवाना  बनाया  तो मैं दीवाना बना.


अब मुझे होश की दुनिया में तमाशा न बना…

बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोए

जो घर देखा आपना मुझसे बुरा न कोए

नुसरत ए मिस्र ए तम्मना तेरे जलवों

के निसार्

मेरी बेदारियों को ख्वाब ए सुलेखां न बना

दोज़ख से कोई काम न जन्नत से कुछ गरज़

जायेंगे उधर जिधर यार ले चले

निगाहे नाज़ से पूछेंगे किसी दिन ये ज़हीन

तूने क्या क्या न बनाया कोई क्या क्या न बना

Published in:  on 02/22/2009 at 1:15 PM Leave a Comment
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Abida sings Jigar – rare compilation

In this rare compilation of an old recording the genius of Abida and Jigar comes alive.Jiagr had this unique way with words and rythm that he could express the most complex ideas in a very simple manner.A real treat for even those who do not understand urdu well!

आदमी आदमी से मिलता मिलता है

दिल मगर कम किसी से मिलता है

भूल जाता हूँ मैं सितम उसके

वो इस सादगी से मिलता है

आज क्या बात है के फूलों का

रंग तेरी हँसी से मिलता है

मिल के भी जो नहीं मिलत्ता

टूट कर दिल उसी से मिलता है

~ जिगर मुरादाबादी

Published in:  on at 12:27 PM Leave a Comment
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