मैं

कुछ  ढूंढ रहा था

पुरानी किताबों में

एक पुरानी तस्वीर

ना जाने कब की

ना जाने कहां से

मिल गयी मट्मैले

पन्नों के बीच

वो शक़्स जो मुझे

एक टक देख रहा था

पेहचाना सा लगा

मैं जानता था उस

बेफिक्र अंदाज़ को

उस बेबाकी को

उस शोखी को

उस मस्ती को

पर् सब से अलग थीं

वो आंखें जो मुझको

मेरे पार देख रही थीं

मेरे और उस अक्स के बीच

कितने बरस बीत गये थे

और घट गया था

ना जाने क्या कुछ

वो जो सोचा था

और वो भी जिसकी

कभी कल्पना तक न की थी

बार बार एक सवाल मन में उठ रहा था

आखिर क्या है जो सांझा है

मुझमें और मेरी इस तस्वीर में

सब कुछ तो बदल गया है

मैं कौन हूं ?

वो जो इस तस्वीर को देख रहा है

या वो जिसकी ये तस्वीर है …

~ आहंग

Was looking for something

In a heap of Old books

An old picture

Wonder from when

or where

fell off from the pages

That face looking at me

was familiar

I knew it

from its careless ways

its outspoken word

The hidden rebel inside

and its want to live life

to the fullest

But what was enchanting

about all this

were those eyes

piercing me

through myself

Between me and my shadow

How the river of time had flowed

so much had passed

between us

That which I had thought off

and the unimaginable too

I kept asking myself

that what is common

between me and my picture

Everything has changed

so which one is me ?

the one looking at the picture

Or whose picture this is…..

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6 comments on “मैं

  1. यादें कभी साथ नहीं छोड़तीं और स्मृतियों से कभी नाता नहीं टूटता…
    भाव बड़ी ही सुंदरता से पिरोये हैं आपने…

    • aahang says:

      thanks!
      ये कविता एक सत्य घटना पर आधारित है.मैं अपनी ही एक पुरानी तस्वीर से identify नहीं कर पा रहा था ……

  2. aahang says:

    हमें कभी कभी खुद को पेह्चान पाने में भी मुश्किल गुज़रती है –
    कहीं है इश्क़ का उजाला कहीं है मौत का अंधेरा
    ना जाने कौन भेस होगा मैं जोगी बनूं या लुटेरा
    कई चेहरे हैं इस दिल के ना जाने कौन सा मेरा….

    पर ये खोज ये सवाल ही तो हैं जो अपने हैं और जो हमे वो बनाते है जो हम है क्योंकि हर सवाल में बद्लाव का बीज छुपा होता है फिर वो बद्लाव हममें हो या हमसे हो. उम्मीद है कि आप सेहमत होंगे नही तो ब्लाग मेरा है और मै आपके विचार वेबस्पेस में उखाड फेंकूंगा 🙂

  3. avanish says:

    bahut aache mere bhai!! i think this is the image that most of us see when we look at our old college photos… but you have captured it nicely..

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