फ़र्ज़ करो…

फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों

फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई हो
फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो

फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों
फ़र्ज़ करो ये नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों

फ़र्ज़ करो ये रोग हो झूठा, झूठी पीत हमारी हो
फ़र्ज़ करो इस पीत के रोग में सांस भी हम पर भारी हो

फ़र्ज़ करो ये जोग बिजोग का हमने ढोंग रचाया हो
फ़र्ज़ करो बस यही हक़ीक़त बाक़ी सब कुछ माया हो

‌- इब्ने इंशा 

 

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This entry was posted in Poetry.

5 comments on “फ़र्ज़ करो…

  1. यशवन्त माथुर says:


    दिनांक 20/01/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    हाउसवाइफ किसे कहते हैं ?……..हलचल का रविवारीय विशेषांक….रचनाकार….रेवा टिबरेवाल जी

  2. Anonymous says:

    vry vry nice

  3. Anonymous says:

    Brilliant Sir..

  4. फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों
    फ़र्ज़ करो ये नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों

    Awesome lines Rajnish ji…

    • aahang says:

      Ibne Insha always has a new was to look at things. You could listen to Ghulam Ali’s rendering of his Ghazal ‘ ye baatein jhootee batein hain….’ .

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