Monday Musing…

In line with the Shastras we must reduce our office timing as we grow old and have more experience – 1 hour less for every 5 years worked. The rest of our time should be spent in self study, meditation, mentoring. Execution must give way to vision and for that you can’t be sitting in front of your laptop keying numbers for 10 hours a day.

In fact someone with 20 years of experience should not need to come to office for more than 4 hours a day.

A hard working CEO should actually be fired 🙂

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शाश्वत के संदर्भ में…

एक रोज़

मुझे साफ साफ याद है

शाम थी, दूर का सफर था

और मै चाय के लिये

उतर गया था एक गांव के पास

एक बूढा किसान

पास के खेत में बैठा

ना जाने शितिज के पार

क्या देख रहा  था

उसके चेहरे पर कोई

भाव नहीं था और ना थे

उसके मन मे दुख सुख

लोभ,मोह,चिंता …….

कहने को तो उसके पास

कोई काम नहीं था

पर  वो इस तरह

अनंत को ताड रहा था

जैसे ये भी कोई काम हो

मेरी चाय खत्म हो गयी

और मैं  चलने लगा

तो हमारे नज़रें मिलीं

और वो मुस्कुरा दिया

जैसे कह रहा हो कि

वो वक़्त को बिता रहा था

जैसे वो चाहता था

और वक़्त मुझ पर बीत रहा था

जैसे वक़्त की मर्ज़ी थी

कर्म मे बंधन है

क्योंकि अच्छा हो या बुरा

कर्म अहं को आग देता है

वक़्त को जीत लिया था

उस बूढे सम्राट ने

जो अब घर जा रहा था कि

कल फिर नये उत्साह, नयी उमंग से

दिन भर  कुछ भी ना करे

बस घूरता  रहे  वक्त को

अनंत काल तक….

‍‍~ आहंग