Mr. Modi in the long run we are all dead..

​While all middle class Indians are supporting PM Modi on Demonetization no one actually knows how it’s going to pan out. For starters :

1. Crores of Indians have been standing in ques for 20 days now. This is tremendous loss of productivity equal to all strikes which would have happened in Kolkata in the last 100 years

2. Common Indian investor has lost lakhs in the stock market and the outlook looks bleak so fairly low chance of getting the money back

3. The small medium businesses have been worst hit and so have the farmers. Looks like Urjit had no idea about this segment. He just checked with the cronies if they have parked their money and pushed the button

4. We have sacrificed family outings, fun in marriages, deferred payment to bus drivers kaam wali bais, milkman, fought with cabbies and everyone has cooperated 

5. Bank employees have been a distressed community, many have even lost their lives and compromised their health

6. The bank’s who gave unscruplous loans to cronies thinking it’s their Baap Ka Paisa have now lowered interest rates on deposits for the common man

The list of woes is endless. Modi must come out with a timeline on when will we begin to see changes and what positive changes they will be. Just like he broke the promise of the reserve bank at 8 PM on 8th November he should come on TV and tell what’s going to happen and by when. Enough of this bhaiyon, behnon and mitron non sense !

Modi says Indian has a great future in the long run. I recall John Maynard Keynes when he says : In the long run we are all dead..

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उखड़े खम्भे और काला धन..

​एक दिन राजा ने खीझकर घोषणा कर दी कि मुनाफाखोरों को बिजली के खम्भे से लटका दिया जाएेगा।

सुबह होते ही लोग बिजली के खम्भों के पास जमा हो गये। उन्होंने खम्भों की पूजा की,आरती उतारी और उन्हें तिलक किया।

शाम तक वे इंतजार करते रहे कि अब मुनाफाखोर टांगे जाएेंगे- और अब। पर कोई नहीं टाँगा गया।

लोग जुलूस बनाकर राजा के पास गये और कहा,”महाराज,आपने तो कहा था कि मुनाफाखोर बिजली के खम्भे से लटकाये जाएेंगे,पर खम्भे तो वैसे ही खड़े हैं और मुनाफाखोर स्वस्थ और सानन्द हैं।”

राजा ने कहा,”कहा है तो उन्हें खम्भों पर टाँगा ही जाएेगा। थोड़ा समय लगेगा। टाँगने के लिये फन्दे चाहिये। मैंने फन्दे बनाने का आर्डर दे दिया है। उनके मिलते ही,सब मुनाफाखोरों को बिजली के खम्भों से टाँग दूँगा।

भीड़ में से एक आदमी बोल उठा,”पर फन्दे बनाने का ठेका भी तो एक मुनाफाखोर ने ही लिया है।”

राजा ने कहा,”तो क्या हुआ? उसे उसके ही फन्दे से टाँगा जाएेगा।”

तभी दूसरा बोल उठा,”पर वह तो कह रहा था कि फाँसी पर लटकाने का ठेका भी मैं ही ले लूँगा।”

राजा ने जवाब दिया,”नहीं,ऐसा नहीं होगा। फाँसी देना निजी क्षेत्र का उद्योग अभी नहीं हुआ है।”

लोगों ने पूछा,” तो कितने दिन बाद वे लटकाये जाएेंगे।”

राजा ने कहा,”आज से ठीक सोलहवें दिन वे तुम्हें बिजली के खम्भों से लटके दीखेंगे।”

लोग दिन गिनने लगे।

सोलहवें दिन सुबह उठकर लोगों ने देखा कि बिजली के सारे खम्भे उखड़े पड़े हैं। वे हैरान हो गये कि रात न आँधी आयी न भूकम्प आया,फिर वे खम्भे कैसे उखड़ गये!

उन्हें खम्भे के पास एक मजदूर खड़ा मिला। उसने बतलाया कि मजदूरों से रात को ये खम्भे उखड़वाये गये हैं। लोग उसे पकड़कर राजा के पास ले गये।

उन्होंने शिकायत की ,”महाराज, आप मुनाफाखोरों को बिजली के खम्भों से लटकाने वाले थे ,पर रात में सब खम्भे उखाड़ दिये गये। हम इस मजदूर को पकड़ लाये हैं। यह कहता है कि रात को सब खम्भे उखड़वाये गये हैं।”

राजा ने मजदूर से पूछा,”क्यों रे,किसके हुक्म से तुम लोगोंने खम्भे उखाड़े?”

उसने कहा,”सरकार ,ओवरसियर साहब ने हुक्म दिया था।”

तब ओवरसियर बुलाया गया।

उससे राजा ने कहा,” क्यों जी तुम्हें मालूम है ,मैंने आज मुनाफाखोरों को बिजली के खम्भे से लटकाने की घोषणा की थी?”

उसने कहा,”जी सरकार!”

“फिर तुमने रातों-रात खम्भे क्यों उखड़वा दिये?”

“सरकार,इंजीनियर साहब ने कल शाम हुक्म दिया था कि रात में सारे खम्भे उखाड़ दिये जाएें।”

अब इंजीनियर बुलाया गया। उसने कहा उसे बिजली इंजीनियर ने आदेश दिया था कि रात में सारे खम्भे उखाड़ देना चाहिये।

बिजली इंजीनियर से कैफियत तलब की गयी,तो उसने हाथ जोड़कर कहा,”सेक्रेटरी साहब का हुक्म मिला था।”

विभागीय सेक्रेटरी से राजा ने पूछा,खम्भे उखाड़ने का हुक्म तुमने दिया था।”

सेक्रेटरी ने स्वीकार किया,”जी सरकार!”

राजा ने कहा,” यह जानते हुये भी कि आज मैं इन खम्भों का उपयोग मुनाफाखोरों को लटकाने के लिये करने वाला हूँ,तुमने ऐसा दुस्साहस क्यों किया।”

सेक्रेटरी ने कहा,”साहब ,पूरे शहर की सुरक्षा का सवाल था। अगर रात को खम्भे न हटा लिये जाते, तो आज पूरा शहर नष्ट हो जाता!”

राजा ने पूछा,”यह तुमने कैसे जाना? किसने बताया तुम्हें?

सेक्रेटरी ने कहा,”मुझे विशेषज्ञ ने सलाह दी थी कि यदि शहर को बचाना चाहते हो तो सुबह होने से पहले खम्भों को उखड़वा दो।”

राजा ने पूछा,”कौन है यह विशेषज्ञ? भरोसे का आदमी है?”

सेक्रेटरी ने कहा,”बिल्कुल भरोसे का आदमी है सरकार।घर का आदमी है। मेरा साला होता है। मैं उसे हुजूर के सामने पेश करता हूँ।”

विशेषज्ञ ने निवेदन किया,” सरकार ,मैं विशेषज्ञ हूँ और भूमि तथा वातावरण की हलचल का विशेष अध्ययन करता हूँ। मैंने परीक्षण के द्वारा पता लगाया है कि जमीन के नीचे एक भयंकर प्रवाह घूम रहा है। मुझे यह भी मालूम हुआ कि आज वह बिजली हमारे शहर के नीचे से निकलेगी। आपको मालूम नहीं हो रहा है ,पर मैं जानता हूँ कि इस वक्त हमारे नीचे भयंकर बिजली प्रवाहित हो रही है। यदि हमारे बिजली के खम्भे जमीन में गड़े रहते तो वह बिजली खम्भों के द्वारा ऊपर आती और उसकी टक्कर अपने पावरहाउस की बिजली से होती। तब भयंकर विस्फोट होता। शहर पर हजारों बिजलियाँ एक साथ गिरतीं। तब न एक प्राणी जीवित बचता ,न एक इमारत खड़ी रहती। मैंने तुरन्त सेक्रेटरी साहब को यह बात बतायी और उन्होंने ठीक समय पर उचित कदम उठाकर शहर को बचा लिया।

लोग बड़ी देर तक सकते में खड़े रहे। वे मुनाफाखोरों को बिल्कुल भूल गये। वे सब उस संकट से अविभूत थे ,जिसकी कल्पना उन्हें दी गयी थी। जान बच जाने की अनुभूति से दबे हुये थे। चुपचाप लौट गये।

उसी सप्ताह बैंक में इन नामों से ये रकमें जमा हुईं:-

सेक्रेटरी की पत्नी के नाम- २ लाख रुपये

श्रीमती बिजली इंजीनियर- १ लाख

श्रीमती इंजीनियर -१ लाख

श्रीमती विशेषज्ञ – २५ हजार

श्रीमती ओवरसियर-५ हजार

उसी सप्ताह ‘मुनाफाखोर संघ’ के हिसाब में नीचे लिखी रकमें ‘धर्मादा’ खाते में डाली गयीं-

कोढ़ियों की सहायता के लिये दान- २ लाख रुपये

विधवाश्रम को- १ लाख

क्षय रोग अस्पताल को- १ लाख

पागलखाने को-२५ हजार

अनाथालय को- ५ हजार

~ हरिशंकर परसाई 

हम हिंदुस्तानी ..

​कुछ रोज़ से देख रहा हूँ की कई फर्ज़ी intellectual ज्ञान पेल रहे हैं कि demonitization से गरीबों का बड़ा नुकसान हो जायेगा, मोदी की policy एयर कंडिशन्ड कमरों में बैठने वालों के लिए हैं, काले धन का इससे कुछ नहीं बिगड़ने वाला वगैरह वगैरह । इनमें से कई नासमझ तो huffington पोस्ट, thewire और कई अन्य अमरीकी ब्लॉग aggregators की पोस्ट शेयर कर रहे हैं जैसे की उन लोगों को हमारे राम सनेही और कमला,विमला की बड़ी पड़ी है । ज़्यादातर को इकोनॉमिक्स और finance से घंटा कोई लेना देना नहीं है।इन लोगों के तर्कों को देखें तो आपको कहीं न कहीं उन लोगों से वैमनस्य की भावना साफ़ दिखाई देगी जो पैसा कमाते हैं upwardly mobile हैं, फिर चाहे वो भरपूर टैक्स देते हों । ये नफरत दरअसल उन लोगों के लिए है जो ज़िन्दगी को ईमानदारी से जीना चाहते हैं, और जीते हैं और आज ज़रा खुश हैं कि इस देश में ईमानदार टैक्सपेयर होना कोई पाप, कोई अभिशाप नहीं है और अब हमें बेईमान नेता, corrupt officials और टैक्स चोर बिज़नस मैन से दबने की ज़रूरत नहीं है । वो दिन दूर नहीं जब रिश्वतखोर और बेईमान होना हिंदुस्तान में फक्र की बात नहीं रह जायेगी, जब कोई नोटों की गड्डी निकालेगा तो लोग उसे “तेरा बाप चोर है” वाली निगाहों से देखेंगे। अब तक ऐसा कभी नहीं था। 

 लेकिन ना भई ना गरीबों का क्या होगा ? किसान मारे जायेंगे, छोटे व्यपारियों की लग जाएगी, दलित और पिछड़ों का शोषण हो रहा है !! चिल्ला चिल्ला कर मातम किया जा रहा है । पर हम लोग शांत हैं चुपचाप जाकर बैंक में अपनी ईमानदारी की कमाई का हिसाब एक बार फिर से दे रहे हैं कोई गुस्सा नहीं, कोई रोष नहीं किसी तरह का । हमें आदत जो है खामोश रहने की, सर झुका कर काम करने की। हम जानते हैं कि बदलाव आ रहा है । उसकी गति धीमी हो सकती है पर अगर एक दिन ऐसा आये कि हर हिंदुस्तानी को उसका हक़ मिले,उसको भी जो एयर कंडिशन्ड कमरे में बैठ कर ही सही पर दिन रात मेहनत करता है तो वो प्रगति है, नियति है, न्याय है ।

एक बात और हमनें कोई गरीबों का ठेका नहीं उठा रखा है कि जाहिलों के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दें । अपने घर में काम करने वाली बाइयों से डील करते हुए अक्सर ये खयाल आया है कि भगवान् इनको ज़रूर नरक में डालना । गरीब को भगवान ने या उसके कर्मों ने गरीब बनाया है हमने नहीं …सो मोदी जी की जय हो !!