हम हैं कि नाम कर रहे हैं..

​अपने सब यार काम कर रहे हैं

और हम हैं कि नाम कर रहे हैं

सब हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर
जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं

है वो बेचारगी का हाल कि हम
हर किसी को सलाम कर रहे हैं 

दाद-ओ-तहसीन का ये शोर है क्यूँ

हम तो ख़ुद से कलाम कर रहे हैं..

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