बनियान


आज सुबह देखा

तो एक गठ्ठर पड़ा था 

कपड़ों का बेड पर

शायद फोल्ड होने के लिए

रखा था दोपहर तक

जब काम कुछ हल्का हो जाता है

घर में 

कपड़ों में बनियानें थीं

मेरी और मेरे बेटे की

जो अब कुछ कुछ

बराबर हो चुकी हैं

साइज़ मे

ज़रा गौर किया तो देखता हूँ

की छोटी वाली चमक रही हैं

एकदम बढ़िया क़्वालिटी 

और किसी में कोई छेद नहीं है

बड़ी वाली बनियानें 

मटमैली सी थीं

पतले कपड़े की सस्ती वाली

अरे अंदर ही तो पहनना है 

वाली मिडिल क्लास मेन्टेलिटी

का बोध कराती हुई 

कुछ में छेद भी थे 

वो अभी इतने बड़े नहीं हुए थे 

कि सौ रुपया खर्च किया जाए

और फिर हवा भी तो आती है

ताज़ा ताज़ा 

पर मैं सोचने लगा की ये फर्क क्यों ?

तब याद आया 

कि बेटे की मां उसके लिए

लाती है बनियान 

और मैं खुद अपने लिए खरीदता हूँ

पापा भी तो यही करते थे..

– आहँग 

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One comment on “बनियान

  1. shilpa13 says:

    Too sweet

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