वो फ़िराक और वो विसाल कहाँ ?

वो फ़िराक और वो विसाल कहाँ

वो शबो रोज़ो माह-ओ-साल कहाँ

थी वो एक शख़्स के तसव्वुर से

अब वो रानाई ए ख़याल कहाँ

फिक्र ए दुनिया में सर खपाता हूँ

मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ ?

~ ग़ालिब

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One comment on “वो फ़िराक और वो विसाल कहाँ ?

  1. kavisujan says:

    बहुत अच्छा
    आपने ग़ालिब को याद करवाया ।
    ग़ज़ल में ग़ालिब सबे बेहतर आज भी हैं

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