जब तेरी समन्दर आँखों में

 

 

ये धूप किनारा शाम ढले
मिलते हैं दोंनो वक्त जहाँ

जो रात न दिन, जो आज न कल
पल भर में अमर, पल भर में धुंआँ

इस धूप किनारे, पल दो पल
होठों की लपक, बाँहों की खनक
ये मेल हमारा झूठ न सच
क्यों रार करें, क्यों दोष धरें
किस कारण झूठी बात करें

जब तेरी समन्दर आँखों में
इस शाम का सूरज डूबेगा
सुख सोयेंगे घर-दर वाले
और राही अपनी राह लेगा …..

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Realization

There was a time I wasn’t

Will be a time I won’t be

So should I look for meaning

And believe there must be some

Or be like river and mountain

Under the moon and sun……

I guess there is no answer

I’d rather let it be

Made no difference to the world then

And  it should not make one to me…

कैसे केह दूं मेरी हमदम….

तुम मेरी आदत हो, तुम मेरा हिस्सा हो

मेरी बेमज़ा जिंदगी का दिलचस्प किस्सा हो

कैसे केह दूं मेरी  हमदम

कि मुझे प्यार नहीं है तुमसे

बहुत से सच और कुछ झूठ कहे हैं मैने

तुम्हारे साथ से दूर सर्द मौसम भी सहे हैं मैंने

मगर वो बात जिसे ना लफ्ज़ कभी दिये हैं मैंने

उसे केहना आज मेरे लिये ज़रूरी है

कि बिन तुम्हारे ज़िंदगी मेरी अधूरी है

मैंनें हमेशा और हरदम ही चाहा है तुम्हें

तुमने माना या नहीं, मैंने सराहा है तुम्हें

यूं  ही साथ चलते चलते शाम ए हयात आएगी

अपने बिछडने का पैगाम साथ लाएगी

मैं जानता हूं कि तुम साथ  रहोगी तब तक

मेरे जिस्म में  आखिरी सांस रहेगी जब तक

कैसे कह दूं मेरी हमदम के मुझे

प्यार नहीं है तुमसे…..

– आहंग

 

फासले…..

तब मैं तुम्हे जानना चाहता था

और तुम मुझे समझ नहीं पाती थीं

अब तुम मुझे जानना नहीं चाहती

और मै तुम्हें समझ नही सकता

दर्मियां अपने , दूरियां तो कम हैं शायद

हां फासले बहुत हैं…..

–  आहंग

 

 

अब तो पथ यही है

जिंदगी ने कर लिया स्वीकार,

अब तो पथ यही है

अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है,

एक हलका सा धुंधलका था कहीं, कम हो चला है,

यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम हो चला है,

क्यों करूँ आकाश की मनुहार ,

अब तो पथ यही है |

क्या भरोसा, कांच का घट है, किसी दिन फूट जाए,

एक मामूली कहानी है, अधूरी छूट जाए,

एक समझौता हुआ था रौशनी से, टूट जाए,

आज हर नक्षत्र है अनुदार,

अब तो पथ यही है|

यह लड़ाई, जो की अपने आप से मैंने लड़ी है,

यह घुटन, यह यातना, केवल किताबों में पढ़ी है,

यह पहाड़ी पाँव क्या चढ़ते, इरादों ने चढ़ी है,

कल दरीचे ही बनेंगे द्वार,

अब तो पथ यही है |

Life has accepted it
This will be my path now
The ferocity of rising tide has faded away,
The fog which was there somewhere is no more,
This stone may melt or may not, but at least its softened,
Why should I beg from the skies,
This must be my path now
This vase made of glass is but fragile,
leaving the ordinary story untold
the bond I had with light looks bleak
and the stars seem so small
But , this will be my path now
The fight, which I have fought with myself,
It’s suffocation, it’s pain, is heard in books only,
I have made the climb not with my feet
but with my conviction,
And these windows are poised to be my doors soon,
I know this is my path now
~ By Dushyant Kumar, interpretative translation by aahang

Joie de vivre…

A playful butterfly

dancing from tree to tree

she looks so full of life

so joyous, so carefree

her colors the same as flowers

her ebullience as in the sunshine

the blue sky, the freedom to fly

I watch it from my window

confined, insipid and listless

days pass; its the same story

I get used to it and

the scene looks awry

Her act is now cliched

monotonous, hungry with greed

from morn to night

it’s just one fight

to live for the day

to hoard for tomorrow

there is no joy

there is no sorrow

she sucks on the nectar

as much as she can

I gaze at her to think

where it all began

Ah ! you beautiful butterfly

do you too think of me

what a blissful life

not to run around the tree

such a peaceful man

so content and so carefree ….

फ़र्ज़ करो…

फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों

फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई हो
फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो

फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों
फ़र्ज़ करो ये नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों

फ़र्ज़ करो ये रोग हो झूठा, झूठी पीत हमारी हो
फ़र्ज़ करो इस पीत के रोग में सांस भी हम पर भारी हो

फ़र्ज़ करो ये जोग बिजोग का हमने ढोंग रचाया हो
फ़र्ज़ करो बस यही हक़ीक़त बाक़ी सब कुछ माया हो

‌- इब्ने इंशा