दोस्ती की वजह कोई नहीं

ज़ुबां खामोशी की

तस्सवुर तुम्हारा                                                

बातें झरना मीठे पानी का

और खयाल फिसलती रेत से

कुछ ज़ाहिर, कुछ ज़ेहेन में बसे

एक रूहानी शाम , तुम्हारा साथ

वक़्त के दरियाओं के पार

कांधा तुम्हारा , दुख सुख हमारे

अश्क़ रुके हैं

पलकों के तले, अनबहे

उलझी हुई उंगलियां

हाथों में हाथ

दोस्ती की कोई वजह नहीं

ये तो है  जन्मों का साथ……..

~ ये कविता मेरे प्रिय मित्र श्री रवि शरन जी ने मेरे ब्लाग के लिये रची है. मैं इस भेंट के लिये उनका बहुत आभारी हूं .

Advertisements