मरीना बीच पर

मरीना बीच पर

बरसों पेहले एक ब्राम्हण ने कहा था

तुम में सूर्य का अंश है                                     sunset-large

दूर शितिज पर डूबते सूरज से

मैं कुछ केहना चाहता हूं

मगर क्या ?

जो मायने नहीं रखता

उसे केहने के क्या मायने

और जो मायने रखता है

उसे केहने की हिम्मत नहीं है मुझमें

तो बस बैठा हू इस इंतज़ार में

कि कब एक बडी सी लेहर आये

और मैं भी डूब जाऊं मेरे सूरज की तरह

धरती की गोद से निकला समन्दर मुझे ऐसे घेर ले

जैसे मां अपने बिलखते हुए बच्चे को

अपने आचल में समेट लेती है

और तब केहने के लिये मेरे पास

कुछ नहीं रहेगा

~ ब कलम खुद

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो

शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो                             evening-2php

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो

About those graceful looks,O sad evening Let’s talk

I am loosing my senses ,about my secrets Let’s talk

ये सुकूत-ए-नाज़ ये दिल की रगों का टूटना

ख़ामुशी में कुछ शिकस्त-ए-साज़ की बातें करो

This graceful stillness,that ruptures my heart’s veins

In this silence,about the loss of music let’s talk

निकहत-ए-ज़ुल्फ़-ए-परीशां, दास्तान-ए-शाम-ए-ग़म

सुबह होने तक इसी अंदाज़ की बातें करो

The fragrance of hair let loose,the story of an evenings sorrow

Till it’s morning just like this, let’s talk

कूछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा

कुछ फ़िज़ा, कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो

From the bars of my confinement,something  light like filters through

Of the skies,about my ambition to fly Let’s talk