मेरे बेटे के नाम ..

सात समन्दर पार से                                                

दुनिया के बाज़ार से

जब मैं कल अपने घर आया

देरे रात थी सब सोये थे

तुमको भी सोता पाया

यूं तो हमेशा यूं होता है

मैं तुमको दुबका लेता हूं

पर उस पल ना जाने क्यों

लेट तुम्हारे पास लग यूं

कि मैं तुम में सिमट गया हूं

छोटे से सीने से लग कर

मेरी आंखें भीग गयीं

एक एक पल में ही जैसे

कितनी सदियां बीत गयीं

उठती गिरती सांसों का

एक अजब एहसास थे तुम

मैं ही तुम से दूर गया था

मेरे कितने पास थे तुम

वक़्त का चरखा डोलेगा

और निर्बल हो जाऊंगा मैं

पास तुम्हारे मेरे बेटे

खुद को पाने आऊंगा मैं

~ By Aahang

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