Majaz Poetry from Kahkashan

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क्या समझती हो कि तुमको भी भुला सकता हूँ मैं

अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैं
क्या समझती हो कि तुमको भी भुला सकता हूँ मैं             couple-on-the-beach

You think I can’t let go of both worlds,I can

You think I can’t forget you ,I can

कौन तुमसे छीन सकता है मुझे क्या वहम है
खुद जुलेखा से भी तो दामन बचा सकता हूँ मैं

It’s your misgiving that you can lose me to her

I can myself be indifferent to that beauty,I can.

दिल मैं तुम पैदा करो पहले मेरी सी जुर्रतें
और फिर देखो कि तुमको क्या बना सकता हूँ मैं

Sow in yourself the same audacity I have

and I will make you someone else ,I can.

दफ़न कर सकता हूँ सीने में तुम्हारे राज़ को
और तुम चाहो तो अफसाना बना सकता हूँ मैं

I can bury your deepest secrets If I will

and I can make them a legend if you want,I can.

तुम समझती हो कि हैं परदे बहुत से दरमियाँ
मैं यह कहता हूँ कि हर पर्दा उठा सकता हूँ मैं

You think that there are lots of curtains that hide

I say I will lift each one of them if I wish,I can.

तुम कि बन सकती हो हर महफ़िल मैं फिरदौस-ए-नज़र
मुझ को यह दावा कि हर महफ़िल पे छा सकता हूँ मैं

Yes you may be the heavenly gaze in any gathering

But I challenge that I can be the life of any party,I can.

आओ मिल कर इन्किलाब ताज़ा पैदा करें
दहर पर इस तरह छा जाएं कि सब देखा करें

Let’s get together and start a a revolution afresh,

and be such that everyone looks at us and says Wow!

~ Majaz Lucknowi

~ interpretative translation By aahang

देखना जज़्बे-मुहब्बत का असर आज की रात

देखना जज़्बे-मुहब्बत का असर आज की रात

मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात

Behold the feeling of our love tonight

On my shoulders rests her beautiful face tonight

और क्या चाहिए अब ऐ दिले-मजरुह तुझे

उसने देखा तो ब-अन्दाज़े दिगर आज की रात

What else you need my lovelorn heart

She saw you with a twinkle in her eye tonight

नूर-ही-नूर है जिस सिम्त उठाऊँ आँखें

हुस्न-ही-हुस्न है, ताहद्दे-नज़र5 आज की रात

Where I look there is light and more light

As far as I see  there is beauty and more beauty tonight

मेरी हर सांस पे वो उनकी तव्वजह क्या खूब

मेरी हर बात पे वो जुम्बिशे सर आज की रात

She cared for my every breath,as if

She nodded on  every word I said tonight

अल्लाह-अल्लाह वह पेशानिए-सीमीं का जमाल

रह गई जम के सितारों की नज़र आज की रात

Allah Allah that shinning forehead

The stars almost  stopped blinking tonight

नग़्मा-ओ-मै का यह तूफ़ाने-तरब क्या कहिए!

घर मेरा बन गया ख़ैय्याम का घर आज की रात

This wonderful storm of music and intoxication

My house has become the house of Khayyam tonight

अपनी रफ़अ़त पै जो नाज़ाँ हैं तो नाज़ाँ ही रहें

कह दो अंजुम से10 कि देखें न इधर आज की रात

O stars if you are proud of your high place,please be

Just tell the skies not to look this way tonight

उनके अल्ताफ़ का इतना ही फ़सूँ काफ़ी है

कम है पहले से बहुत दर्दे-जिगर आज की रात

Her magical kindness has bestowed this upon me

There seems to be no pain in my heart tonight

नर्गिसे नाज़ पे वो नीदं का हल्का सा खुमार

वो मेरे नग्म ए शीरीं क असर आज की रात

Those sleepy eyes of  her flower face

That effect of my love song on her tonight

Poet ~ Majaaz Lucknowi

interpretative transaltion by aahang

हम पी भी गये छलका भी गये

तस्कीने दिले मेह्ज़ूं  न हुई ,वो सईए करम फर्मा भी गये

इस सईए करम को क्या कहिये,बेहला भी गये तड्पा भी गये

हम अर्ज़े वफा भी कर न सके ,कुछ कह न सके,कुछ सुन न सके

यां हमने ज़ुबां ही खोली थी ,वां आंख झुकी ,शर्मा भी गये

ये रंग ए बहारे आलम है क्यों फिक्र है तुझको ऎ साक़ी

मेहफिल तो तेरी सूनी न हुई ,कुछ उठ भी गये ,कुछ आ भी गये

रुदादे गमे उल्फत उनसे, हम क्या केह्ते ,क्यूं कर केहते

एक हर्फ ना निकला होठों से ,और आंख में आंसू आ भी गये

उस मेहफिले कैफो मस्ती में ,उस अंजुमने इरफानी में

सब जाम बक़फ बैठे ही रहे ,हम पी भी गये छलका भी गये

Taskeen-E-Dil-E-Mahzoo Na Hui, Woh Saay-E-Qaram Farma Bhi Gaye
Us Saay-E-Qaram Ka Kya Kahiye, Behla Bhi Gaye Tadpa Bhi Gaye

Taskeen = Peace or Contentment; Mahzooz = Delighted; Saay-E-Qaram = Futile Efforts of Kindness

Ek Arz-E-Vafa Bhi Kar Na Sake, Kuchh Keh Na Sake, Kuchh Sun Na Sake
Yahan Hum Ne Zubaan Hi Khole Thi, wahan Aankh Jhuki Sharma Bhi Gaye

Arz-E-Vafa =  Tale Of Love

Ashuftagi-E-Vehashat Ki Qasam, Hairat Ki Qasam Hasrat Ki Qasam
Ab Aap Kahe Kuch Ya Na Kahe, Hum Raaz-E-Tabassum Paa Bhi Gaye

Ashuftagi = Misery; Vahashat = Loneliness; Tabassum = Smile

Rudaad-E-Gham-E-Ulfat Unse, Hum Kya Kehte Kyun Kar Kehte
Ek Harf Na Nikla Hothon Se, Aur Aankh Mein Aansoo Aa Bhi Gaye

Rudaad = Story; Ulfat = Love; Harf = Syllable

Arbaab-E-Junoon Pe Furqat Mein, Ab Kya Kahiye Kya Kya Guzaara
Aaye The Savaad-E-Ulfat Mein, Kuch Kho Bhi Gaye Kuch Paa Bhi Gaye

Arbaab = Friends; Junoon = Passion; Furqat = Absence (of Lovers)

Yeh Rang-E-Bahaar-E-Aalam Hai, Kya Fiqr Hai Tujh Ko Aye Saaqi
Mehfil To Teri Suni Na Hui, Kuch Uth Bhi Gaye Kuch Aa Bhi Gaye

Is Mehfil-E-Kaif-O-Masti Mein, Is Anjuman-E-Irfaani Mein
Sab Jaam-Ba-Kaf Baithe Rahe, Hum Pee Bhi Gaye Chalka Bhi Gaye

Kaif = Intoxication; Anjuman-E-Irfaani = Gathering For Wisdom; Jaam-Ba-Kaf = Hands holding glasses of Wine (Ba-Kaf = Hands filled with)

The below sequence from the movie Pyaasa shows Majaaz reciting the Ghazal above.The old man is Jigar Moradabadi.

नन्ही मुन्नी सी पुजारन

इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन, पतली बाहें, पतली गर्दन।  ananya

भोर भये मन्दिर आयी है, आई नहीं है माँ लायी है।

वक्त से पहले जाग उठी है, नींद अभी आँखों में भरी है।

ठोडी तक लट आयी हुई है, यूँही सी लहराई हुई है।

आँखों में तारों की चमक है, मुखडे पे चाँदी की झलक है।

कैसी सुन्दर है क्या कहिए, नन्ही सी एक सीता कहिए।

धूप चढे तारा चमका है, पत्थर पर एक फूल खिला है।

चाँद का टुकडा, फूल की डाली, कमसिन सीधी भोली-भाली।

कान में चाँदी की बाली है, हाथ में पीतल की थाली है।

दिल में लेकिन ध्यान नहीं है, पूजा का कुछ ज्ञान नहीं है।

कैसी भोली और सीधी है, मन्दिर की छत देख रही है।

माँ बढकर चुटकी लेती है, चुपके -चुपके हँस देती है।

हँसना रोना उसका मजहब, उसको पूजा से क्या मतलब।

खुद तो आई है मन्दिर में, मन  उसका है गुडिया घर में।