बाज़ार

लगा है बज़ार          

हो रहा है कारोबार

बिक रहे हैं

झूठ और सच

भूख  और  ऐय्याशी

दिल और जान

जिस्म , ईमान

वो देखो उस ठेले पर क्या है

शायद कोई प्यार बेच रहा है

या फिर वफादारी

शराफत से बोलता है

जितना है उतना तोलता है

लगता है ईमनदार है बेचारा

कोई अठ्ठन्नी भी ना देगा

और दी तो ये जहर खा लेगा

बैठा रहेगा दिन भर खाली

और खायेगा पुलिस से गाली

कैसा फकीर जैसा है

ना पेट में रोटी है ना जेब में पैसा है

लोग पास से गुज़रते है

और तय नहीं कर पाते शायद

भीख दें या दुआ लें

By aahang

 

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