तब देख बहारें होली की…..

जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की
और दफ के शोर खडकते हों,तब देख बहारें होली की

परियों के रंग दमकते हों, तब देख बहारें होली की
खम शीशे जाम छलकते हों ,तब देख बहारें होली की

महबूब नशे में छकते हों, तब देख बहारें होली की
सीनों से रंग ढलकते हों ,तब देख बहारें होली की

दिल में अहसास महकते हो, तब देख बहारे होली की
पकवान बहुत से पकते हों ,तब देख बहारें होली की…..

होली मुबारक !! खूब मज़े कीजिये…..

The beautiful composition above is from Nazeer Akbarabadi and the last 2 lines have been added by yours truly as my contribution to the spirit of holi.

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2 comments on “तब देख बहारें होली की…..

  1. दिल में अहसास महकते हो, तब देख बहारे होली की
    पकवान बहुत से पकते हों ,तब देख बहारें होली की….
    Bhaut khoob Rajnish ji,sunder panktiyaa’n…

    Happy holi……..

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